ये जहां...

अंतहीन शुरुआत

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anupammishra


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संडे सिंड्रोम ( पति-पत्नी की वेदना )

Posted On: 16 Mar, 2012  
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अनुपम मिश्रा जी का लेखन इतना सारगर्भित लगा की मेरे पास शब्द ही नहीं है की उनकी तारीफ़ कर सकूं,फिर भी औपचारिका के चलते उन्हें बधाइयां हों,स्वीकार करें आपकी फोटो देखकर लगा आपका लंबा अनुभव है और अनुभव की चाशनी में लपेटे गए ये शब्द और वाक्य हैं जोकिसी को भी प्रभावित किये बिना नहीं रह सकते?मिश्रा जी अपने ऐसा सुंदर और वस्त्वक वर्णन किया है जैसे आँखों देखा हाल!हम आभारी हैiआपके इस लेख से नव युवतीयां यदि कुछ सीख लें तो गोपाल कांदा और अमर मणि त्रिपाठी जैसे धूर्त साहस भी नहीं जुटा पायेंगे.आशा है अपने को परोसने वाली बालाएं आफिस के बाहर ही अपनी भूख कम करेंगी ,जोकि ज्यादा जोखिम वाला काम नहीं होगा!

के द्वारा: pitamberthakwani pitamberthakwani

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