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अंतहीन शुरुआत

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हे धरती के भगवान...

Posted On: 17 Mar, 2012 Others में

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हे धरती के भगवान।

तुमको मेरा कमर को आधार मानकर 45 डिग्री पर प्रणाम। पुतलियां पथरा गई थीं अरसे से टीवी देख देख कर । और तुम्हारे रनों का टोटा हर रोज़ मेरी चांद को टिपियाता। मैं झल्लाता । लेकिन तुम्हें मेरी झल्लाहट पर रहम न आता। लेकिन आज मैं सारे निजी कार्यों से निवृत्त होकर तुम्हारी अर्चना में जुटा था। सुबह से धूप दीव नैवेद्य के साथ तुम्हारी ईश्वर स्वरुप महिमा मंडित बल्ला उठाऊ तस्वीर का पूजन कर रहा था। पड़ोस से पंडित श्री श्री 108 कदाचित तामलोट लोटन प्रसाद सत्यानासी काशी निवासी पंडित राधे श्याम उपाध्याय को भी बुलवाया था। इस आशा में कि कहीं मुझसे पूजा में कोई मंत्र पढ़ गया तो तुम फिर शतक से चूक जाओगे। और मैं अपनी टांट को टिपियाता फिरुंगा। लेकिन तुम हे धरती के भगवान आज बरेली रोजा पैसेंजर की तरह जब चल निकले तो फिर बरेली से चलने के बाद रोजा ही रुके। तुमने वो महा सुस्त शतक बना ही डाला। जिसका इंतज़ार पिछले एक साल से आपके भक्त कर रहे थे। हे सट्टेबाजों के ईष्ट तुम मेरे घनिष्ट हो अब मुझे ये पता चल गया है। क्योंकि जिस धैर्यपूर्वक पारी में तुमने अपनी जीवटता की मिसाल पेश की है उसकी आशा किसी बुज़ुर्ग खिलाड़ी से ही की जा सकती है। तुमने 147 गेंदों का संहार किया। तब जाकर बड़ी मुश्किल से 114 रन जुटा सके। हे धरती के भगवान तुम्हारे धैर्य को मेरा फिर उसी डिग्री पर प्रणाम। हे क्रिकेट जगत के राजहंस तुम इस युग के ईसा हो। क्योंकि ईसा भी अपने विरोधियों के लिए कहा करते थे कि हे भगवान इन्हें क्षमा करना ये नहीं जानते कि ये क्या कर रहे हैं। तुम भी तो यही कहते हो। लोग तुम्हारी आलोचना करते हैं। और तुम उनसे कुछ नहीं कहते अपना बड़प्पन दिखाकर उन्हें माफ कर देते हो। हे सचिन प्रभू आज तुम्हारे ही महा सुस्त शतक की बदौलत भारत बांग्लादेश जैसी पिद्दी टीम के सामने 289 बनाने लायक हुआ। लेकिन प्रभू की तो लीला अपरंपार होती है। देखिए कैसे झोली में गिर गया मैच बांग्लादेश की। हे दीन दुखियारे सटोरियों के महा प्रभू तुम्हारे महाशतक को मेरा महा प्रणाम। तुम ऐसे ही सतत खेलते जाना। किसी की न सुनना। साल में एक सैकड़ा मार देना। साल भर लोग तुम्हारी आलोचना करेंगे उसके बाद जब तुम शतक वीर बनोगे। तो टीवी पर ब्रेकिंग चलेगी। अखबार में मोटी मोटी सुर्खियां छपेंगी। क्रिकेट का बूढ़ा भगवान आज भी महान। तुम ऐसे ही क्रिक्रेट खेलोगे तो एक दिन तुम्हारा औसत कोर्टनी वॉल्श सा हो जाएगा। 42 से घटकर तुम्हारा औसत 4.2 तक आ जाएगा। तुम यहां भी रिकॉर्ड बना दोगे। क्योंकि तुम्हें सचिन रिकॉर्ड तेंदुलकर भगवान भी तो कहा जाता है। हे देवी अंजलि के देवता अब तुम्हारी संतान के क्रिक्रेट खेलने का वक्त आ गया है। तुम आदेश दोगे तो मैं उसके लिए भी अगरबत्ती जलाऊंगा । पंडित राधेश्याम को बुलवाऊंगा। लेकिन अब मेरी तुमसे एक गुहार है तुम क्रिकेट के सन्यासी हो जाओ। कुछ दिन घर बैठो । परिवार के साथ घूमो-फिरो। और फिर कुछ दिन बाद हमें कमेंट्री बॉक्स में दिखो। कृपया मेरी किसी भी बात को अन्यथा न लेना। मैं तो बस तुमसे विनम्र निवेदन कर रहा हूं। कहीं तुम नाराज़ न हो जाना। मैं तुम्हारी नाराज़गी को बर्दाश्त न कर पाऊंगा। सालों से क्रिकेट देख रहा हूं। तुम्हें मैने भगवान के रुप में पाया है। भगवान को कोई कुछ कहता है तो मुझे बुरा लगता है। इसलिए मेरी भी इज्जत का ख्याल रखना। एशिया कप के बाद मैदान में दिखाई न देना। मैं तो अपने भगवान को अब कमेंट्री बॉक्स में देखना चाहता हूं। हे दयानिधान मेरी गुहार पर गौर फरमाना। क्योंकि कमेंट्री बॉक्स में भी रोजगार के बड़े साधन है। इतना ही कहूंगा । ज्यादा वक्त न मेरे पास है और न ही तुम्हारे पास। चिट्ठी पहुंच जाए तो जवाब जरुर देना। भूल चूक लेनी देनी। तुम्हारा बनवारी लाल। इतिश्री फिलहाल।

 

 

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

March 18, 2012

सादर नमस्कार! सुन्दर और सहज व्यंग्य ………दिल को छू गया……हार्दिक आभार. कृपया मेरी सच्ची प्रेम कहानी पर अपना बहुमूल्य सुझाव और प्रतिक्रिया देना चाहें… http://merisada.jagranjunction.com/2012/02/15/%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%BE-%E0%A4%8F%E0%A4%95-%E0%A4%85%E0%A4%A7%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A5%81-%E0%A4%B8/

    anupammishra के द्वारा
    March 18, 2012

    शुक्रिया…

Rahul Yadav के द्वारा
March 18, 2012

नमस्कार अनुपम जी, बेहतर रचना यहा के भगवान पर|

March 17, 2012

गद्य में पद्य का एहसास… कटुक्तियों को हास्ययुक्त व्यंग्योक्ति की शह। शानदार। लाजवाब।

    anupammishra के द्वारा
    March 18, 2012

    अद्भुत कमेंट…

dineshaastik के द्वारा
March 17, 2012

व्यंगात्मक शैली में लिखी सुन्दर एवं सशक्त व्यंग रचना।  जो अपने बारे में सोचता है, वही भगवान बनता है। देखते नहीं आज उसके साथ कितनी जनता है। बधाई देने का लगा हुआ है ताँता। इंडिया के हारने पर कोई नहीं जाता। भगवान देश की लुटिया ओर कितनी डुबाओगे। कब संयास लोगे क्या बताओगे।


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