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अंतहीन शुरुआत

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संडे सिंड्रोम ( पति-पत्नी की वेदना )

Posted On: 16 Mar, 2012 में

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पूरे 6 दिन बाद फिर से संडे आ गया
छुट्टी का दिन, फुरसत का लम्हा
आज फिर 6 दिन बाद एक दंपति देर से सोकर उठे हैं
बेफिक्र हैं
जाड़े के मौसम में बिस्तर पर अंगड़ाइयां ले रहे हैं
कमरे से बाहर
आज बूढ़ी मां के झाड़ू लगाने का मौका है
अस्सी साल की ये झुकी हुई पीठ
पूरा आंगन बहोरती है
शनय शनय मां की तकलीफें सर्दी से कांपते होठों पर आ जाती हैं
धीरे धीरे वो बड़बड़ाने लगती है
लेकिन इस तरीके से कि कोई सुन ना सके
इधर नौकरी पेशा दंपति का हाल ज्यों का त्यों है
वो अभी भी अपने आप को थका हारा महसूस कर रहे हैं
इसलिए बिस्तर पर ही आराम कर रहे हैं
कि अचानक पति ने कमरे से बाहर नज़र डाली
तो पाया कि मां कुछ बुदबुदाकर झाड़ू लगाने में व्यस्त है
आखिर आज का ही तो दिन है जब उसे काम करना है
ये सोचकर उस मां का बेटा फिर सो गया
पत्नी पहले से सो रही थी
घड़ी का छोटा कांटा 9 तक पहुंच चुका था, जबकि बड़ा ठीक 12 पर था।
गुनगुनी धूप कमरे के भीतर प्रवेश कर गई
इतने में दंपति की आंख खुल गई
आंखों को दोनो मलते हुए, हाथों से योग करते हुए, दोनो खड़े हुए
पत्नी ने अपने हाथों से बिस्तर को तहाया
फिर पति से अकड़कर बोली
तू इतनी देर से उठा अब तक क्यों नहीं नहाया ?
पति बोला
डार्लिंग आपको बोला तो था आज संडे है
थोड़ा देर तक सोने दो
पत्नी बोली
जानते हो तुम्हारे चक्कर में मैं कितना लेट हो गई
हर रोज़ 6 बजे उठती हूं
आज 6 को तुमने उल्टा
सब तुम्हारी गलती है
तुम्हें पता है ना मां कहती है
चाय नहीं बनी, नाश्ता नहीं बना, खाना कब बनाओगी
क्या बिस्तर में पड़ी सोती ही रहोगी
काम की ना काज की नौ मन अनाज की
पति बेचारा पहले ही काम के बोझ का मारा
पत्नि से एक बार फिर सकुचा कर बोला
जानू वो हमारी मां है, और वो जो खाट पर बैठे हैं वो हमारे बाप हैं
क्या इनकी बातें तुम्हें ताने सी लगती हैं
सोचो इन्होंने तो तुम्हारे पति को पाला है
इन्हीं के पास अपनी किस्मत का ताला है
पत्नी बोली
चलो बातें न बनाओ आज संडे है काम करने दो
खुद तो देर से सोकर उठते हैं मेरी भी आदत खराब करते हैं
इतने में दरवाज़े पर दस्तक हुई
पत्नी ने अपने बिखरे बालों को पीछे समेटने की कोशिश की
और पहुंच गई दरवाज़े तक
गोपाल आज तुम भी बहुत लेट आए हो ?
क्या दूध में पानी मिलाकर लाये हो
अरे नहीं बीबीजी आज देर से सोकर उठा था
संडे था ना इसलिए
वैसे आज हिसाब हो जाता तो ठीक रहता
कुल महीने के 700 रुपए होते हैं
चलो ठीक है, अगर दूध पनीला हुआ तो पैसे न दूंगी
अरे बीबीजी गरीब के पेट पर लात काहे मारती हैं
चलो चलो अच्छा ठीक है आती हूं पैसे लेकर
इधर पति दैनिक क्रिया से निवृत्त होने के लिए अटैच बाथरुम में चला गया था
अखबार अपने साथ ले गया था
पत्नी बोली
अरे क्या आज संडे के दिन अखबार नहीं आया
बाथरुम से गूंजती हुई एक आवाज़ आई
आया है मेरी रुपमती मेरे पास है
हां हां और कोई जगह नहीं मिली अखबार पढ़ने के लिए
तुम कहो तो तुम्हारा नाश्ता भी वहीं भिजवा दूं
खाते रहना, निकालते रहना
डार्लिंग तुम तो मसखरी करती है
देखो !
खून न जलाओ मेरा
एक तो वैसे भी इतना काम पड़ा है
बाहर दूध वाला पैसे लेने पर अड़ा है
मेरी जेब से निकाल कर दे दो ना कल ही तो सेलरी अकाउंट में आई थी
पत्नी ने जेब से 700 रुपए निकाले
और दूध वाले की ओर बढ़ा दिये
दूध वाला शुक्रिया अदा करते हुए आगे बढ़ गया
अरे सुनते हो, दस बज गया है
क्या वहीं बैठे रहोगे या हमारी सौतन से गप्पें लड़ा रहे हो
पति बोला
सौतन से गप्पें लड़ानी होंगी
तो पखाने के बजाय पार्क नहीं जाऊंगा
फालतू में शक करती हो
कल बताया नहीं था कब्ज़ियत हो गई है
चलो चलो जल्दी निकलो मुझे भी जाना है
उसके बाद ससुर के लिए दलिया, सास के लिए साबूदाना
और तुम्हारा लिए सिंगट्टा पकाना है
डार्लिंग तुम तो हमेशा झगड़ती रहती हो
काम कौन सा ढंग का करते हो झगड़ूं नहीं तो क्या करुं
तौलिया से सिर को पोछता हुआ पति बाहर आया
तो पत्नी अटैच बाथरुम के भीतर चली गई
जाते हुए पति को आदेश दे गई
एक काम करना 15 मिनट बाद चाय चढ़ा देना
मम्मी पापा के लिए बिना चीनी की
और बाकी तो तुम समझदार होना डार्लिंग
करीब डेढ़ घंटे बाद जब पति ने पत्नी के मुख से डार्लिंग सुना
तो उसका दिल भर आया
उसने प्रेम रस में भीगे शब्दों से कहा
ठीक है जान
निकल कर तो आओ तुम्हारे लिए चाय क्या नाश्ता भी बना दूंगा
हां हां ठीक है ठीक है
बाथरुम से निकलकर ताने की एक लहर पति के कानों तक पहुंची
हां पता है कितना बना लोगे नाश्ता
चाय ही बना लो तो बड़ी बात है
याद है ना पिछले संडे का शक्कर के बूरे की जगह नमक डाल दिया था
अरे जान उस दिन तो किचन में अंधेरा था
कुछ समझ ही नहीं आ रहा था
खैर पति ने गैस पर कुछ देर बाद चाय को चढ़ाया
और उस चाय को अपने बूढ़े मां बाप तक पहुंचाया
चाय की गर्मी पहुंचते ही जैसे बूढ़े दंपति के सीने को कुछ राहत मिली
वो अपनी रजाई में अब दुबके हुए थे
इस इंतज़ार में कि कब दलिया आएगा, कब साबूदाना आएगा
पति ने पत्नी के हिस्से की चाय केटली में रख दी
इस आस में कि पत्नी जब नहा धोकर निकलेगी तो चाय देखकर खुश हो जाएगी
लेकिन नहाकर निकली पत्नी के तेवर बदले हुए थे
बोली
गीजर में गर्म पानी क्यों नहीं बचाया था
पता है ठंडे पानी से नहाकर मेरी हालत खराब है
और तुम हो कि तुम्हें अखबार पढ़ने से फुर्सत नहीं
बहुत ठंड लग रही है
जल्दी से चाय बनाओ
पति फिर प्रेम से बोला
चाय हाज़िर है मेरी बेगम
ज्यादा होशियार न बनो
केटली में रखी चाय देते हो जाओ ताजी बनाकर लाओ
पति पत्नी के इस झगड़े में 12 बज गए
गुनगुनी धूप अब कुछ ज्यादा उबल रही थी
इसलिए बेटे ने मां और पिता जी की खाट को बाहर धूप में डाल दिया
जाड़े की ये दोपहर बुज़ुर्ग दंपति के लिए बड़ी सुहानी थी
इधर कमरे में नहा धोकर ताजी चाय पीकर पत्नी तैयार हो चुकी थी
अब उसे नाश्ते और खाने की ड्यूटी निभानी थी
बोली एजी सुनते हो
चूंकि पति अपने मां बाप के पास बैठे अखबार पढ़ रहा था
इसलिए पत्नि की आवाज़ को सुन न सका
पत्नी फिर बोली
एजी सुनते हो
पड़ोस के जेनरेटर की आवाज़ में ये आवाज़ फिर सुनाई न दी
इसलिए इस बार बेगम साहिबा का सुर बदल गया
एजी सुनते हो कहां मर गए
अरे आया आया कहो क्या कह रही हो
कितनी देर से बुलाती हूं
क्या तुमको समझ नहीं आता
बारह बज गए अभी तक नाश्ता नहीं बना
हाए रे फूटी किस्मत ऐसा पति मिला
शास्त्री जी ठीक ही कहते थे
कि तुम्हारा पति निठल्ला होगा
न नाश्ते की सुध, न खाने की सुध
चलो एक काम करो ये मैने लिस्ट बना दी है
जाओ बाज़ार से हफ्ते भर का राशन लेकर आओ
और हां ज़रा जल्दी आना
खाना बनाने में मेरी मदद करनी है, मैं तब तक नाश्ता बनाती हूं
ठीक है डार्लिंग मैं यूं गया और यूं आया
अब पत्नी किचन में जाती है
दो छोटे कूकर में बुज़ुर्गों का नाश्ता बनाती है
एक में दलिया, एक में साबू दाना है
दोनों के पकने का इंतज़ार करती है
करीब दस मिनट बाद ये नाश्ता उन बुज़ुर्गों को परोसा जाता है।
जाड़े की धूप में करीब साढ़े बारह बजे मिला ये नाश्ता
जन्नत सा अहसास कराता है
दोनों बिना दांतों के जबड़ों से नाश्ते की जुगाली करते हैं
सुबह 6 बजे के उठे ये बूढ़े दोपहर साढ़े बारह बजे नाश्ता करते हैं
पड़ोस के बनिये से हफ्ते भर का राशन लेकर पति घर आ गया था
पत्नी उस वक्त नाश्ता कर रही थी
इसलिए पति ने किचन में खुद जाकर सामान को रखा
पत्नी बोली
नाश्ता रखा है कढ़ाई में ले लेना अब मैं कहां किचन में आऊंगी
आजाओ बाहर ही लॉन में बैठकर साथ खाते हैं
नहीं मैं मम्मी पापा के पास बैठकर कर लूंगा
तुम उधर ही कर लो नाश्ता
हफ्ते भर बाद तो वक्त मिलता है इनके पास बैठने का
चलो ठीक है और हां उनसे पूछ लेना कि अगर और दलिया चाहिए तो किचन में रखा है
परोस देना
ठीक है।
करीब दस मिनट बाद पत्नी आवाज़ लगाती है
अतुल एक काम करना
तनिक सब्ज़ी काटने में मेरी मदद करना
कल दफ्तर से आते वक्त मेरे पैर में कांच चुभ गया था तो अब तक दर्द हो रहा है
हाए दईया मर गई
पत्नी ने शनिवार को चुभी उस कांच की वेदना प्रकट की
तो पति का गला भर आया
क्या हो गया मेरी जान
तुमने कल तो कुछ नहीं बताया
क्या बताती
तुम बेकार ही परेशान होते
आखिर मैं पति हूं तुम्हारा
तुम्हारे दुख दर्द का साथी हूं
मुझे नहीं तो किसे बताओगी
क्या यूं ही हर तकलीफ मुझसे छिपाओगी
पति के ये इमोशनल सवाल पत्नी के गले उतर गए
उसने कहा नहीं बस ऐसा कुछ नहीं
मैं तो बस मजाक कर रही थी
मैने सोचा इसी बहाने कुछ काम में हाथ बंट जाएगा
तुम और मैं कुछ देर साथ रहेंगे सब्ज़ी काटने के बहाने
अगर ऐसा ही था
तो ये चोट का नाटक क्यों ?
पत्नी बोली
तुम्हें सब्ज़ी काटनी है तो काटो वरना चलते बनो
सारा काम मैं ही कर लूंगी
पत्नी ने गुस्से से चाकू उठाया
और तेजी से सब्ज़ी पर चलाने लगी
मानो नाज़ियों की सेना यहूदियों का संहार कर रही हो
चाकू और सब्ज़ी के बीच हुई इस जंग में चाकू जीत गया
चित्रलेखा की उंगली कट गई
खून बेतरतीबी से बहा जा रहा था
और चित्रलेखा की आंखों से अश्रुओं का सैलाब बह रहा था
अतुल की नज़र जैसे ही चित्रलेखा की कटी उंगली पर पड़ी
उसने फौरन उस उंगली को अपने मुंह में रख लिया।
मानो वो उस खून को बहने न देना चाहता हो
अतुल को यूं देख चित्रलेखा बोली
क्या तुम मुझसे बहुत प्यार करते हो
पति आंखों में आंखें डालकर मसखरे अंदाज़ में बोला
नहीं तुम्हारी सौतन को बहुत प्यार करता हूं
ये मसखरा अंदाज़ पत्नी भांप न सकी
और बोली
तो जाओ जाते क्यों नहीं उस मीना कुमारी मधुबाला के पास
उसी की काटना उसी की चूसना
अब घर आए तो बताए देती हूं
पति अपनी पत्नी के तेवर देखकर बोला
अरे मैने तो मज़ाक में कहा था
तो मैं कौन सा सीरियस हूं
डार्लिंग तुम भी ना
पति के सॉफ्ट कॉर्नर का पत्नी ने फायदा उठाया
और बोली अच्छा एक काम करना
मैने सब्ज़ी काट दी है
अब तुम इसे गैस पर चढ़ा देना
आटा माढ़ दिया है रोटी बना देना
चावल भिगो दिये हैं
कूकर में पका लेना
मैं सोने जा रही हूं, दो घंटे बाद उठा लेना
मेरे तो बहुत दर्द हो रहा है
आज संडे के दिन बहुत काम हो जाता है
चाय बनाओ
नाश्ता बनाओ
खाना बनाओ
क्या क्या करें ???
अब थोड़ा काम तुम कर लो मैं सोने जा रही हूं प्लीज़

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

chandanrai के द्वारा
March 16, 2012

आदरणीय साहब, बिलकुल ठीक विचार ! बहुत बेहतरइन भाव , सुमधुर Pls. comment on http://chandanrai.jagranjunction.com/Berojgar


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