ये जहां...

अंतहीन शुरुआत

11 Posts

28 comments

anupammishra


Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.

Sort by:

बढ़िए कुछ और आगे…

Posted On: 31 Dec, 2012  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

Others में

0 Comment

कहीं अंधेरे, कहीं उजाले

Posted On: 13 Sep, 2012  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others में

0 Comment

स्टेशन पर ही ठहर गई मुहब्बत

Posted On: 9 Sep, 2012  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others में

0 Comment

कॉरपोरेट बालाएं, कॉरपोरेट बॉस, मामला बिंदास

Posted On: 11 Aug, 2012  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (4 votes, average: 4.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others में

8 Comments

कभी हम, कभी तुम

Posted On: 14 Jun, 2012  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

Others में

1 Comment

अलग हैं वो लोग…

Posted On: 17 May, 2012  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others में

0 Comment

प्रियतमा तुम्हारी याद में…

Posted On: 14 Apr, 2012  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (3 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others में

3 Comments

रेडियो नहीं रोटी (सरकारी रहम से रोटी की जुगाड़)

Posted On: 30 Mar, 2012  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (3 votes, average: 4.33 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others में

8 Comments

तुम…

Posted On: 22 Mar, 2012  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others में

1 Comment

हे धरती के भगवान…

Posted On: 17 Mar, 2012  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (4 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others में

6 Comments

Page 1 of 212»

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

अनुपम मिश्रा जी का लेखन इतना सारगर्भित लगा की मेरे पास शब्द ही नहीं है की उनकी तारीफ़ कर सकूं,फिर भी औपचारिका के चलते उन्हें बधाइयां हों,स्वीकार करें आपकी फोटो देखकर लगा आपका लंबा अनुभव है और अनुभव की चाशनी में लपेटे गए ये शब्द और वाक्य हैं जोकिसी को भी प्रभावित किये बिना नहीं रह सकते?मिश्रा जी अपने ऐसा सुंदर और वस्त्वक वर्णन किया है जैसे आँखों देखा हाल!हम आभारी हैiआपके इस लेख से नव युवतीयां यदि कुछ सीख लें तो गोपाल कांदा और अमर मणि त्रिपाठी जैसे धूर्त साहस भी नहीं जुटा पायेंगे.आशा है अपने को परोसने वाली बालाएं आफिस के बाहर ही अपनी भूख कम करेंगी ,जोकि ज्यादा जोखिम वाला काम नहीं होगा!

के द्वारा: pitamberthakwani pitamberthakwani

के द्वारा: anupammishra anupammishra

के द्वारा: anupammishra anupammishra

के द्वारा: anupammishra anupammishra

के द्वारा: anupammishra anupammishra

के द्वारा: anupammishra anupammishra




latest from jagran